जन लोका विस्मय हा दुंदुभीरव ये मंत्रनिनादे भद्रासनी अभिषेका नमवी शीर्ष जलकुंभस्त्रावा मिटे न परि विधिलेखा द्रववित मन, तनु कंपविकल ती तात राजमुद्रा
जन लोका विस्मय हा दुंदुभीरव ये मंत्रनिनादे भद्रासनी अभिषेका नमवी शीर्ष जलकुंभस्त्रावा मिटे न परि विधिलेखा द्रववित मन, तनु कंपविकल ती तात राजमुद्रा