तारे नही ये तो रातको
तारे नही, ये तो रातको आतिश भरे मोरे आहने है लिख दिया आसमां पर तेरे सितम का माजरा ओ गुलबदन् जादूनयन ! फूलों से नाजुक तन तेरा ! जालीम तेरे नयनोंने क्यौं घायल् किया जियरा मोरा? कभि कहके कुछ पछताये हम कभी रहके चुप पछताये हम पर एकही नतीजा ये हुवा- उलझनसे मेरा दिल गिरा तुझे क्या खबर है ओ बेवफा आँखों कि हो तुम रोशनी लग जा गले को नाजनीं ये दिलभी रोशन् कर जरा