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तारे नही ये तो रातको

Tare Nahi Ye To Raat Ko

विद्याधर गोखले

तारे नही, ये तो रातको
आतिश भरे मोरे आहने
है लिख दिया आसमां पर
तेरे सितम का माजरा

ओ गुलबदन्‌ जादूनयन !
फूलों से नाजुक तन तेरा !
जालीम तेरे नयनोंने क्यौं
घायल्‌ किया जियरा मोरा?

कभि कहके कुछ पछताये हम
कभी रहके चुप पछताये हम
पर एकही नतीजा ये हुवा-
उलझनसे मेरा दिल गिरा

तुझे क्या खबर है ओ बेवफा
आँखों कि हो तुम रोशनी
लग जा गले को नाजनीं
ये दिलभी रोशन्‌ कर जरा